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trading vs investing in hindi

trader vs investors in hindi: 

  हे दोस्तों।
        आज हम interesting topic discuss करने वाले हैं. जिसका impact अबकी trading or investing की psychology पर हो सकता है। वैसे तो स्टॉक मार्केट में पैसे कमाने के कई तरीके मौजूद है। लेकिन आपके कुछ डाउट क्लियर होना जरूरी है। मार्केट में दो तरह के लोग होते हैं ट्रेडर और इन्वेस्टर. आज हम देखेंगे की दोनों में क्या फर्क है? और आपको पता चल जाएगा कि मार्केट किस आधार पर चलता है। तो आप इस पोस्ट को पूरा पढ़िए।
trader vs investors in hindi

   Trader vs investors in hindi

 Deffrance of traders or investor's 

          हमने कई बार सुना है कि ट्रेडर बहुत ही active होते हैं। और बहुत ही फास्ट ट्रेडिंग कर के मार्केट से निकल जाते हैं।
        और इन्वेस्टर मतलब मार्केट में एक बार इन्वेस्ट करते हैं तो लोंग टर्म के लिए छोड़ देते हैं।
         कई बार ऐसा भी होता है की long time इन्वेस्टमेंट करके भी हमें उस शेर से ज्यादा फायदा नहीं होता। तो इसका क्या कारण हो सकता है, इसके लिए trading  or  investing को समझना होगा आपको तो सबसे पहले हम ट्रेडर को समझते हैं।
trader vs investors in hindi

           trader vs investors in hindi

What is a Traders : 

          ट्रेडर डेली और शॉर्ट टर्म बेसिस पर मार्केट में पैसा बनाने की सोचते हैं। स्टॉक कौन सा है, सेक्टर कौन सा है, है इससे ट्रेडर को कोई फर्क नहीं पड़ता।
          जो लोग ट्रेडिंग करते हैं उनका कंपनी के विजन या फंडामेंटल स्टडी से कोई लेना देना नहीं होता। ट्रेडर सिर्फ प्राइस को फॉलो करते हैं। जो उनकी चार्ट पर रिफ्लेक्ट होती है। मतलब जो ट्रेडर हे वह टेक्निकल एनालिसिस का सहारा लेकर शेयर को बाय और सेल करते हैं. 
         ट्रेडिंग में आपको एक सर्टन लिमिट में टारगेट और स्टॉपलॉस लगाकर काम करना होता है।
        कंपनी की कोई भी बेनिफिट ट्रेडर को नहीं मिलती है. ट्रेडर्स सिर्फ प्राइस मोमेंट पर काम करता है। ट्रेडिंग हिस्टोरिकल डेटा ध्यान में रखकर की जाती है।
   अब हम जानते हैं कि इन्वेस्टर क्या होता है? 

What is a investor:

       इन्वेस्टर कंपनी के साथ जुड़ा होता है। वह बहुत ही ध्यानपूरक कंपनी को सिलेक्ट करता है। क्योंकि उसका व्यू लोंग टर्म होता है। इन्वेस्टर जो होता है वह कंपनी का फंडामेंटल एंड टेक्निकल एनालिसिस करके मार्केट में पैसा इन्वेस्ट करते हैं.
        हम कहते हैं कि इन्वेस्टर्स के पास धीरज होना चाहिए, लोंग टर्म इन्वेस्टमेंट करनी चाहिए, जैसे कि 5 साल, 10 साल, 20 साल.लेकिन यह कॉन्सेप्ट पुरानी हो चुकी है अगर आपको अभी के मार्केट में इनवेस्टमेंट करनी है तो इन्वेस्टर को भी एक्टिव होना चाहिए हम इसे एक उदाहरण से समझते हैं:
      बैंक ऑफ इंडिया जोकि बैंक सेक्टर का स्टॉक है जिसकी अभी मार्केट प्राइस ₹170 चल रही है। महेश नाम का लड़का है उसने बैंक ऑफ इंडिया के 1000 शेयर 2006 में ₹150 के प्राइस पर खरीदे थे। अगर आज के मार्केट प्राइस से उसका वैल्यूएशन देखते हैं तो 10 साल में सिर्फ 14% रिटर्न टोटल इन्वेस्टमेंट अमाउंट पर मिली है। मतलब डेढ़ लाख रुपए की इन्वेस्टमेंट 10 साल में सिर्फ ₹20000 प्रॉफिट हुई है। जो रिटर्न है वह बहुत ही कम है लेकिन अगर महेश एक्टिव होता मार्केट नजर होती तो उसे पता चलता की अक्टूबर 2007 में बैंक ऑफ इंडिया की स्टॉक प्राइस ₹590 हो गई थी जिससे उसकी इंगेजमेंट की वैल्यू ₹590000 हो जाती यानी 4 गुना ज्यादा। 
        इसलिए आप इन्वेस्टर भी हो तो आपको 15 से 20 दिनों में मार्केट में नजर रखनी चाहिए यही आपके लिए फायदेमंद रहेगा। 
       ट्रेडर इन्वेस्टर को लिक्विडिटी प्रोवाइड करता है, और इन्वेस्टर ट्रेडर को वोलैटिलिटी प्रोवाइड करता है। स्टॉक मार्केट में संतुलन बनाए रखने के लिए दोनों का होना बहुत जरूरी है.
             तो दोस्तों। मैं आशा करता हूं कि आपको हमारी पोस्ट trader vs investor पसंद आई होगी
अगर आपका कोई सुझाव हो तो कंमेंट मैं जरूरत बताये.
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          जय हिंद.....! वन्दे मातरम.......!
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